पंजाब में प्रवासी मज़दूर, करोना-कर्फ्यू आफत और अंध-राष्‍ट्रवादी प्रचार

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‘महकमा पंजाबी’ के फेसबुक पन्ने पर डाली गई एक पोस्ट के लेखक और इस पर टिप्पणियाँ करने वाले बहुतेरों को अंध-राष्ट्रवाद ने इतना अंधा कर दिया है कि वे कोरोना एवं कर्फ्यू की इस आफत के चलते भूख व मौत का सामना कर रहे गरीब प्रवासी मज़दूरों के ख़िलाफ़ भी ज़हर उगलने और नफ़रत भड़काने से बाज़ नहीं आ रहे। इन मज़दूरों का कसूर क्या है? ‘महकमा पंजाबी’ ने एक वीडियो डाली है, जिसमें लुधियाना से हज़ारों किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश में अपने गाँवों की ओर पैदल चले जा रहे मज़दूर कह रहे हैं कि यदि वे यहाँ रहे तो भूख से मर जाएँगे। फैक्ट्री मालिक उनके काम के पैसे नहीं दे रहे, यदि ये पैसे मिल जाते तो गुज़ारा चल जाता। वे कितनी मुसीबत में हैं, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए जाने का ख़तरा उठाने को भी तैयार हैं, क्योंकि इससे कम से कम रोटी तो मिलेगी। इनमें से कुछ मज़दूर इस भ्रम का शिकार हैं कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य की सीमा पर उन्हें घर छोड़ने के लिए बसों का प्रबंध किया हुआ है…

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मुक्ति मार्ग के फेसबुक पन्ने में प्रकाशित

एक ’84 और : दिल्ली में संघी टोलों द्वारा क़त्लेआम, इस बार मुस्लिम समुदाय निशाने पर •संपादकीय

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23 फ़रवरी से दिल्ली में जो हिंसा हुई है, वह सिख क़त्लेआम 1984 के ख़ूनी कांड का दोहराव है। जानलेवा हथियारों से लैस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षित गुंडे तथा उनकी रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलती दिल्ली पुलिस, 1984 के सिख क़त्लेआम के उस दौर को इतिहास के रंगमंच पर दुबारा पेश कर रही थी। इस बार कांग्रेस के जगदीश टाइटलर व सज्जन कुमार की जगह भाजपा के कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा, अभय कुमार व अमित शाह जैसे नेता दिल्ली को सांप्रदायिक आग में झोंक रहे थे। पगों व दुप्पटों की जगह गोल टोपियों और बुर्कों को निशाना बनाया गया है। जय श्री राम, भारत माता की जय के नारे लगाते हुए यह गुंडा-पुलिस की भीड़ मुस्लिम समुदाय की बाक़ायदा शिनाख़्त करके हमले कर रही थी। क़ातिलों के इस गिरोह ने मुस्लिम समुदाय की दुकानें जलाईं, रिहायशी कॉलोनियों में घुसकर आतंक फैलाया, बेरहमी से मुस्लिम समुदाय के लोगों को मारा-पीटा…

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मुक्ति मार्ग – बुलेटिन 3 ♦ मार्च 2020 में प्रकाशित

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कौडि़याें के भाव पूँजी‍पतियों को बेच रही है मोदी सरकार •रणबीर

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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों मतलब सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपना, इनका 100 प्रतिशत निजीकरण करना मोदी हुकूमत के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है। जनता को हिंदुत्वी सांप्रदायिक माहौल में उलझाकर सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को देशी-विदेशी पूँजीपतियों को खुले हाथों से लुटाने में लगी हुई है। सितंबर 2019 में वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफ़सर ने एक बयान में कहा था कि मोदी सरकार की नीति के मुताबिक़ सार्वजनिक क्षेत्रों में जो कुछ भी बेचने लायक़ है, बेच दिया जाएगा तथा जो कुछ बेचने लायक़ नहीं भी है, उसे भी बेचने की कोशिश की जाएगी। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत होते ही नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने एक बयान में कहा था कि सरकार पहले 100 दिनों के अंदर श्रम क़ानूनों में संशोधनों व भूमि बैंक तैयार करने के लक्ष्य को पूरा करने के साथ ही निजीकरण को तेज़ी से आगे बढ़ाने का लक्ष्य भी पूरा करेगी…

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मुक्ति मार्ग – बुलेटिन 3 ♦ मार्च 2020 में प्रकाशित

डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा •मानव

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फ़रवरी के आख़िरी सप्ताह में संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा था, जो भले ही समझौते-संधियों के लिहाज़ से फीका रहा, लेकिन दिखावे में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। ट्रंप के इस दौरे के लिए भारत के नागरिकों का अरबों रुपया दिखावेबाज़ी में ख़र्च किया गया। मोदी के राज्य गुजरात के अहमदाबाद शहर (वैसे 2014 से ही जो भी बड़ा नेता भारत दौरे पर आता है, वह मोदी के राज्य गुजरात ज़रूर जाता है) को इस मक़सद के लिए तैयार किया गया, और ट्रंप की आँखों को कोई तकलीफ़ न हो, इसके लिए ग़रीब बस्तियों को भी दीवार खड़ी करके ढँक दिया गया। भले ही भारत-अमरीका व्यापार संधि तो इस बार परवान नहीं चढ़ सकी, जिसका कि दोनों देशों में बहुत प्रचार किया गया था, लेकिन दोनों देशों के शासक गलियारे में मोदी-ट्रंप की इस मुलाक़ात को कामयाब बताया जा रहा है…

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मुक्ति मार्ग – बुलेटिन 3 ♦ मार्च 2020 में प्रकाशित

भाजपा-आर.एस.एस. के हाथ सिखों के ख़ून से भी सने हैं •रणबीर

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आर.एस.एस.-भाजपा द्वारा दिल्ली में मुसलमानों का क़त्लेआम किया गया है। यह सन् ’84 के वक़्त दिल्ली में हुए सिखों के क़त्लेआम की तर्ज़ पर किया गया है। भले ही आर.एस.एस.-भाजपा हमेशा इससे मुकरते रहे हैं, पर इस कट्टर हिंदुत्ववादी गुंडा गिरोह की सिख क़त्लेआम–84 में भूमिका जगज़ाहिर है। अब भाजपा-आर.एस.एस. सिख क़त्लेआम के मुद्दे पर राजनीतिक समीकरणों के तहत कांग्रेस के ख़िलाफ़ बोलते हैं और सिखों के लिए मगरमच्छ के आँसू बहाते हैं। पर ये क़त्लेआम–84 के कांग्रेस के सहयोगी हैं। इंदिरा गांधी के क़त्ल के बाद सिखों का क़त्लेआम करने वाले गुंडा गिरोहों का नेतृत्व करने वाले सिर्फ़ सज्जन कुमार, कमलनाथ, जगदीश टाइटलर, भजन लाला बिश्नोई, हरिकिशन लाल भगत जैसे कांग्रेसी नेता व अन्य कार्यकर्ता ही नहीं थे, बल्कि इनमें इस समय केंद्र सरकार पर काबिज़ भाजपा (जिसे सिखों की पार्टी कहलाने वाली शिरोमणि अकाली दल पार्टी का समर्थन है) के संगठन आर.एस.एस. के नेता व कार्यकर्ता भी शामिल थे। आर.एस.एस. की इस क़त्लेआम में सोची-समझी, योजनाबद्ध भागीदारी थी। पर इसकी चर्चा बहुत कम होती है…

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मुक्ति मार्ग – बुलेटिन 3 ♦ मार्च 2020 में प्रकाशित

दिल्ली में भाजपा की हार और ‘आप’ की जीत के मायने! •पावेल

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दिल्ली विधानसभा के चुनाव में अपनी सारी ताक़त झोंक देने के बाद भी भाजपा के हाथ बड़ी हार लगी है। भाजपा ने अपने मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों से लेकर 200 से ज़्यादा सांसदों को चुनाव मैदान में उतार दिया था। अमित शाह ने चुनाव प्रचार अभियान की कमान ख़ुद सँभालते हुए चुनाव को सांप्रदायिक रंग देकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने के लिए भड़काऊ भाषण देने के साथ-साथ घर-घर जाकर परचा तक बाँटा था। नागरिकता संशोधन का़नून के हो रहे विरोध को निशाना बनाकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने का हरसंभव प्रयास करने और अपनी पूरी की पूरी पलटन को चुनाव के अखाड़े में उतार देने के बाद भी भाजपा को सिर्फ़ 8 सीटें मिलीं। दूसरी तरफ़ आम आदमी पार्टी ने एकतरफ़ा जीत में 62 सीटें हासिल कीं और कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल सकी…

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मुक्ति मार्ग – बुलेटिन 3 ♦ मार्च 2020 में प्रकाशित